पाठ - 16 ठेले पर हिमालय कक्षा-दसवीं

 

पाठ - 16

                                   ठेले पर हिमालय                                       

लेखक - डॉ. धर्मवीर भारती

अभ्यास

() विषय - बोध

1) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो पंक्तियों में दीजिए -

) लेखक कौसानी क्यों गए थे?

उत्तर - हिमालय की बर्फ़ को बहुत निकट से देख पाने के लिए लेखक कौसानी गए थे।

) बस पर सवार लेखक ने साथ-साथ बहने वाली किस नदी का ज़िक्र किया है?

उत्तर - बस पर सवार लेखक ने साथ- साथ बहने वाली कोसी नदी का ज़िक्र किया है।

) कौसानी कहाँ बसा हुआ है?

उत्तर- सोमेश्वर की घाटी के उत्तर में जो ऊँची पर्वतमाला है, उस पर, बिल्कुल शिखर पर कौसानी बसा हुआ है।

) लेखक और उनके मित्रों की निराशा और थकावट किस के दर्शन से छूमंतर हो गई?

उत्तर- लेखक और उनके मित्रों की निराशा और थकावट हिम दर्शन से छूमंतर हो गई।

) लेखक और उनके मित्र कहाँ ठहरे थे?

उत्तर- लेखक और उनके मित्र डाक बंगले में ठहरे थे।

) दूसरे दिन घाटी से उतरकर लेखक और उनके मित्र कहाँ पहुँचे?

उत्तर- दूसरे दिन घाटी से उतरकर लेखक और उनके मित्र बैजनाथ पहुँचे, जहाँ गोमती नदी बहती है।

) बैजनाथ में कौन-सी नदी बहती है?

उत्तर- बैजनाथ में गोमती नदी बहती है।

2) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार पंक्तियों में दीजिए:-

1) लेखक को ऐसा क्यों लगा जैसे वे ठगे गए हैं?

उत्तर- कौसानी के अड्डे पर जाकर जब बस रुकी तो छोटा-सा, बिल्कुल उजड़ा-सा गाँव और बर्फ़ का कहीं नाम-निशान देखकर लेखक को ऐसा लगा कि जैसे वे ठगे गए हैं।

2) सबसे पहले बर्फ़ दिखाई देने का वर्णन लेखक ने कैसे किया है?

उत्तर- लेखक को सबसे पहले बर्फ़ बादलों के टुकड़े जैसी लगी थी, जिसका अजब-सा रंग था - सफ़ेद, रूपहला और ही हल्का नीला, पर तीनों का ही आभास देता हुआ रंग था। फिर अचानक लेखक के मन में विचार आया कि हिमालय की बर्फ़ को ही बादलों ने ढाँप रखा है। उसे ऐसा लगा कि जैसे कोई छोटा-सा बाल स्वभाव वाला शिखर बादलों की खिड़की से झाँक रहा है।

3) खानसामे ने सबको खुशकिस्मत क्यों कहा?

उत्तर- क्योंकि उनके आते ही उन्हें बर्फ़ दिखाई दे गई थी। उनसे पहले 14 टूरिस्ट वहाँ आए थे। वे हफ़्ते भर बर्फ़ का इंतज़ार करते रहे लेकिन उन्हें बर्फ़ नहीं दिखी थी। इसलिए खानसामे ने सब मित्रों को खुशकिस्मत कहा।

4) सूरज के डूबने पर सब गुमसुम क्यों हो गए थे?

उत्तर- सूरज के डूबने पर सब गुमसुम इसलिए हो गए थे क्योंकि जिस हिम दर्शन की आशा में वे काफ़ी समय से टकटकी लगाकर देख रहे थे, उनकी यह इच्छा मिट्टी में मिल गई थी।

5) लेखक ने बैजनाथ पहुँच कर हिमालय से किस रूप में भेंट की?                              

उत्तर- लेखक ने बैजनाथ पहुँच कर देखा कि वहाँ पर गोमती नदी बह रही थी। गोमती की उज्ज्वल जलराशि में हिमालय की बर्फ़ीली चोटियों की छाया तैर रही थी। लेखक ने इस जल में तैरते हुए हिमालय से जी भर कर भेंट की।

3) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर छह या सात पंक्तियों में दीजिए-

) कोसी से कौसानी तक में लेखक को किन-किन दृश्यों ने आकर्षित किया?

उत्तर- 1) सुडौल पत्थरों पर कल-कल करती हुई कोसी, किनारे के छोटे-छोटे सुंदर गाँव और हरे मखमली खेत।

2) सोमेश्वर की सुंदर घाटी

3) छोटे-छोटे पहाड़ी डाकखाने, चाय की दुकानें और कभी-कभी कोसी या उसमें गिरने वाले नदी-नालों पर बने हुए पुल।

4) सोमेश्वर घाटी के उत्तर में ऊँची पर्वतमाला, जिसके शिखर पर बसा कौसानी।

5) पर्वतमाला के अंचल में पचासों मील चौड़ी कत्यूर की घाटी।

6) हरे मखमली कालीनों जैसे खेत, सुंदर गेरू की शिलाएँ काटकर बने हुए लाल-लाल रास्ते, जिनके किनारे सफ़ेद-सफ़ेद पत्थरों की कतार और इधर-उधर से आकर आपस में उलझ जाने वाली बेलों की लड़ियों-सी नदियाँ।

7) हरे खेत, नदियाँ और वन जो क्षितिज के धुँधलेपन में, नीले कोहरे में घुल रहे थे।

8) बादल के एक टुकड़े के हटते ही हिम दर्शन

9) पिघलते केसर जैसा ग्लेशियरों में डूबता सूर्य।

10) लाल कमल के फूलों जैसी बर्फ़।

     कोसी से कौसानी तक इन सभी दृश्यों ने लेखक को आकर्षित किया।

) लेखक को ऐसा क्यों लगा कि वे किसी दूसरे ही लोक में चले आए हैं?

उत्तर- सोमेश्वर की घाटी से चलने पर उत्तर दिशा में जब लेखक को कौसानी दिखाई दिया तो उसने देखा कि सामने की घाटी में अपार सौंदर्य बिखरा हुआ था। पर्वतमाला ने अपने अंचल में कत्यूर की रंग-बिरंगी घाटी छिपा रखी थी। पचासों मील चौड़ी यह घाटी, हरे मखमली कालीनों जैसे खेत, सुंदर गेरू की शिलाएँ काटकर बने हुए लाल-लाल रास्ते, जिनके किनारे सफ़ेद-सफ़ेद पत्थरों की कतार और इधर-उधर से आकर आपस में उलझ जाने वाली बेलों की लड़ियों-सी नदियाँ। इन सभी दृश्यों को देखकर लेखक को ऐसा लगा कि वे किसी दूसरे ही लोक में चले आए हैं।

) लेखक को 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक कैसे सूझा?

उत्तर- लेखक को इस शीर्षक को बिल्कुल भी ढूँढना नहीं पड़ा। यह शीर्षक उसके मन में बैठे-बिठाए तब आया, जब वह एक पान की दुकान पर अपने अल्मोड़ावासी मित्र के साथ खड़ा था कि तभी ठेले पर बर्फ़ की सिलें लादे हुए बर्फ़ वाला आया। ठंडी, चिकनी, चमकती बर्फ़ से  भाप उड़ रही थी। वे क्षणभर उस बर्फ़ को देखते रहे, उठती हुई भाप में खोए रहे और खोए-खोए से ही बोले,"यही बर्फ़ तो हिमालय की शोभा है।" और तभी  लेखक को 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक सूझ गया।

4) निम्नलिखित में संधि कीजिए-

हिम+आलय   -     हिमालय                                सोम+ईश्वर     -     सोमेश्वर

हर्ष+अतिरेक   -   हर्षातिरेक                               वि+आकुल      -   व्याकुल

                                                              (ख) भाषा-बोध

1) निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए-

1) अच्छी किस्मत वाला          खुशकिस्मत                             2)  चार रास्तों का समूह        -      चौरस्ता

3) अपने में लीन                  -    आत्मलीन                                4) जहाँ कोई न रहता हो       -       निर्जन

5) जिसका कोई पार न हो     -    अपार                                  6) जिसमें कोई कलंक न हो   -    निष्कलंक

2) निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-

i) पहाड़      -       पर्वत, गिरि                                ii) सूरज       -       दिनकर, भास्कर       

iii) धरती       -      भूमि, भू                                  iv) कमल       -      जलज, सरोज    

v) मुँह           -      मुख, आनन                             vi) नदी         -       सरिता, तटिनी                                      

vii) बादल       -      मेघ, घन                                viii) हाथ          -      हस्त, कर


लेखन   - विनोद कुमार (हिंदी शिक्षक)स.ह.स.बुल्लेपुर,लुधियाना

         गुरप्रीत कौर(हिंदी शिक्षिका) स ह स लापरा लुधियाना

         शेखर (हिंदी शिक्षक) स.मि.स. दातारपुर रूपनगर

संशोधक – डॉ॰ राजन (हिंदी शिक्षक)लोहारका कलां, अमृतसर