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पाठ - 14 राजेन्द्र बाबू (निबंध)

 

पाठ - 14      राजेन्द्र बाबू (निबंध)

महादेवी वर्मा (लेखिका)

(क) विषय - बोध

1) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक दो पंक्तियों में दीजिए :-

प्रश्न 1. राजेंद्र बाबू को लेखिका ने प्रथम बार कहाँ देखा था?

उत्तर : राजेंद्र बाबू को लेखिका ने प्रथम बार पटना स्टेशन पर देखा था

प्रश्न 2. राजेंद्र बाबू अपने स्वभाव और रहन-सहन में किसका प्रतिनिधित्व करते थे ?

उत्तर : राजेंद्र बाबू अपने स्वभाव और रहन-सहन में एक साधारण भारतीय कृषक का प्रतिनिधित्व करते थे।

प्रश्न 3. राजेंद्र बाबू के निजी सचिव और सहचर कौन थे?

उत्तर : राजेंद्र बाबू के निजी सचिव और सहचर भाई चक्रधर थे ।

प्रश्न 4. राजेंद्र बाबू ने किनकी शिक्षा की व्यवस्था करने के लिए लेखिका से अनुरोध किया ?

उत्तर : राजेंद्र बाबू ने लेखिका से अपनी 15-16 पौत्रियों की शिक्षा की व्यवस्था करने के लिए अनुरोध किया।

प्रश्न 5. लेखिका प्रयाग से कौन-सा उपहार लेकर राष्ट्रपति भवन पहुँची थीं?

उत्तर : लेखिका प्रयाग से सिरकी के बने बारह सूपों का उपहार लेकर राष्ट्रपति भवन पहुँची थीं।

प्रश्न 6. राष्ट्रपति को उपवास की समाप्ति पर क्या खाते देख कर लेखिका को हैरानी हुई?

उत्तर : राष्ट्रपति को उपवास की समाप्ति पर उबले आलू खाते देखकर लेखिका को हैरानी हुई।

2) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-चार पंक्तियों में दीजिए:-

प्रश्न 1. राजेंद्र बाबू को देखकर हर किसी को यह क्यों लगता था कि उन्हें पहले कहीं देखा है?

उत्तर : राजेंद्र बाबू की आकृति और उनके शरीर का गठन एक सामान्य भारतीय की तरह था। उनकी वेशभूषा भी एक आम व्यक्ति के समान थी। उनका स्वभाव तथा रहन-सहन भी एक सामान्य भारतीय या भारतीय किसान के समान था। इसलिए उन्हें जो भी देखता था उसे ऐसा ही लगता था कि उन्हें पहले कहीं देखा है।

प्रश्न 2. पंडित जवाहरलाल नेहरू की अस्त-व्यस्तता तथा राजेंद्र बाबू की सारी व्यवस्था किसका पर्याय थी?

उत्तर : पंडित जवाहरलाल नेहरु जी की अस्त-व्यस्तता भी व्यवस्था से निर्मित होती थी किंतु राजेंद्र बाबू की सारी व्यवस्था ही अस्त-व्यस्तता से परिपूर्ण थी। अर्थात् जवाहरलाल नेहरू जी का सारा कार्य अस्त-व्यस्त होने पर भी व्यवस्थित दिखाई देता था और राजेंद्र बाबू का सारा काम व्यवस्थित होता था, ठीक होता था परंतु देखने में अस्त-व्यस्त दिखाई देता था और जब भी कोई उनकी अस्त-व्यस्तता देख लेता था तो वे एक बालक की भांति सकुचा जाते थे।

प्रश्न 3. राजेंद्र बाबू की वेशभूषा के साथ उनके निजी सचिव और सहचर चक्रधर बाबू का स्मरण लेखिका को क्यों हो आया ?

उत्तर : राजेंद्र बाबू की वेशभूषा के साथ उनके निजी सचिव और सहचर चक्रधर बाबू का स्मरण लेखिका को इसलिए हो आया क्योंकि चक्रधर बाबू भी तब तक अपने मोज़े तथा जूते नहीं बदलते थे जब तक मोजों से पाँचों उंगलियाँ बाहर नहीं निकलने लगतीं थीं। जूतों के तलवों में सुराख नहीं हो जाते थे। वे अपने वस्त्र भी जीर्ण-शीर्ण हो जाने तक नहीं बदलते थे। वे राजेंद्र बाबू के पुराने वस्त्रों को पहनकर वर्षों उनकी सेवा करते रहे ।

प्रश्न 4. लेखिका ने राजेंद्र बाबू की पत्नी को सच्चे अर्थों में धरती की पुत्री क्यों कहा है ?

उत्तर : राजेंद्र बाबू की पत्नी बहुत ही सरल, क्षमामयी तथा त्याग-भावना वाली स्त्री थीं । बिहार के ज़मींदार परिवार की बहू और भारत के प्रथम राष्ट्रपति की पत्नी होने पर भी उन्हें कोई अहंकार नहीं था। वे सभी का ध्यान रखती थीं। वे बहुत ही विनम्र स्वभाव की थीं। इसीलिए लेखिका ने उन्हें सच्चे अर्थों में धरती की पुत्री कहा है।

प्रश्न 5. राजेंद्र बाबू की पोतियों का छात्रावास में रहन-सहन कैसा था ?

उत्तर : राजेंद्र बाबू की पोतियाँ अन्य सामान्य बालिकाओं के समान छात्रावास में बहुत ही सादगी और संयम से रहती थीं। खादी के कपड़े पहनती थीं और स्वयं ही उन्हें धोती थीं। उनके साबुन, तेल आदि का खर्च भी सीमित था। कमरे की सफाई और झाड़-पोंछ भी वे स्वयं करती थीं। गुरुजनों की सेवा भी करती थीं।

प्रश्न 6. राष्ट्रपति भवन में रहते हुए भी राजेंद्र बाबू और उनकी पत्नी में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हुआ - उदाहरण देकर स्पष्ट करें।

उत्तर : यह बात बिल्कुल ठीक है कि राष्ट्रपति भवन में रहते हुए भी राजेंद्र बाबू और उनकी पत्नी में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हुआ , उदाहरण के तौर पर अपनी पोतियों के संबंध में उन्होंने लेखिका से कहा था कि उनकी पोतियाँ अब तक जैसे रहती आई हैं अब भी वैसे ही रहेंगी। उनकी पत्नी पहले की तरह ही स्वयं भोजन बनाकर पति, परिवार और परिजनों को खिलाने के बाद ही स्वयं अन् ग्रहण करती थीं। उपवास की समाप्ति पर भी वे फल व मिठाइयों आदि के स्थान पर उबले हुए आलू खाते थे।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 6-7 पंक्तियों में दीजिए :

प्रश्न:-1. राजेंद्र बाबू की शारीरिक बनावट, वेशभूषा और स्वभाव का वर्णन करें।

 उत्तर:- महादेवी वर्मा द्वारा  राजेंद्र बाबू जी की शारीरिक बनावट, वेशभूषा और स्वभाव का वर्णन निम्नलिखित अनुसार किया गया है :-

1.शारीरिक बनावट :-

               राजेंद्र बाबू के शरीर का गठन एक सामान्य भारतीय के समान ही था ।उनके काले घने कटे हुए बाल, चौड़ा माथा,घनी भृकुटियों के बीच बड़ी आँखें, मुख के अनुपात में कुछ भारी नाक, कुछ गोलाई लिए चौड़ी ठुड्डी,कुछ मोटे पर सुडौल होंठ,  गेहुआँ वर्ण, ग्रामीणों जैसी बड़ी बड़ी मूंछें, ऊपर के होंठ पर ही नहीं नीचे के होंठ पर भी अपने बालों का आवरण डाले हुए थीं। हाथ, पैर ,शरीर सब में लंबाई की ऐसी विशेषता थी जो दृष्टि को अनायास ही आकर्षित कर लेती थी।

 2.वेशभूषा :-

           उनकी वेशभूषा अस्त-व्यस्त होती थी। वह खादी की धोती ऐसा फंटा देकर बांधते थे कि एक और दाहिने पैर पर घुटना  छूती थी और दूसरी और बाएं पैर की पिंडली। मोटे खुरदरे काले गले के कोट के ऊपर का भाग बटन टूट जाने के कारण खुला रहता था। पैरों में मोज़े फटे होते और  वह गाँधी टोपी पहनते।

3. स्वभाव :- 

        राजेंद्र बाबू स्वभाव और रहन-सहन में सामान्य भारतीय कृषक का ही प्रतिनिधित्व करते थे । देश के राष्ट्रपति होने के बावजूद केवल बिल्कुल साधारण जीवन व्यतीत करते थे।

प्रश्न:- 2.पाठ के आधार पर राजेंद्र बाबू की पत्नी की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन करें।

उत्तर:- राजेंद्र बाबू की पत्नी एक सचिव भारतीय नारी थी। उनके चरित्र की निम्नलिखित विशेषताओं का वर्णन महादेवी वर्मा ने अपने निबंध में किया है:-

1.क्षमामयी :- 

           महादेवी वर्मा के अनुसार राजेंद्र बाबू की पत्नी धरती की पुत्री थी। वह धरती के समान क्षमामयी, सहनशील, ममतामयी तथा त्याग की भावना से परिपूर्ण है।

2.ममतालु :-

         जब वह अपने पोतियों को मिलने छात्रावास में जाती थीं तो वह सभी बालिकाओं तथा नौकरों का समान रुप से ध्यान रखती थीं और छात्रावास कुछ घंटे जाने पर भी सब को बुला- बुलाकर उनका हालचाल पूछती थीं।

3.विनम्र :-

        बिहार के जमींदार परिवार की पुत्र वधू और स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी होने का उनमें लेशमात्र भी अभिमान नहीं था। वह बहुत ही विनम्र स्वभाव की थीं । इसलिए नौकरों के साथ भी भेदभाव नहीं करती थीं।

4.सरल ह्रदया :-

             वे सरल हृदया थीं। वे राष्ट्रपति भवन में भी अपना भोजन स्वयं बनाती थीं तथा पति, परिवार व परिजनों को खिलाकर ही स्वयं अन्न ग्रहण करती थीं‌।

5. धार्मिक भावना से परिपूर्ण :-

 राजेंन्द्र बाबू की पत्नी धार्मिक प्रवृत्ति की थीं।गंगा स्नान के समय में खूब दान करती थीं। सच्चे अर्थों में वह धरती की पुत्री थीं।

आशय स्पष्ट कीजिए :

 (क) सत्य में जैसे कुछ घटाना या जोड़ना संभव नहीं रहता वैसे ही सच्चे व्यक्तित्व में कुछ भी जोड़ना-घटाना संभव नहीं है।

उत्तर :- प्रस्तुत कथन लेखिका महादेवी वर्मा ने राजेंद्र बाबू के संबंध में कहा है। उनके अनुसार जिस प्रकार सच में कुछ भी जोड़ा या घटाया नहीं जा सकता क्योंकि सच अपने आप में पूरा होता है, ठीक उसी प्रकार राजेंद्र बाबू जैसे सच्चे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति में भी कुछ कम या अधिक नहीं किया जा सकता, न ही उसकी आवश्यकता होती है क्योंकि सच्चा व्यक्तित्व अपने आप में पवित्र और पूरा होता है।

(ख) क्या वह सांचा टूट गया जिसमें ऐसे कठिन कोमल चरित्र ढलते थे ।

उत्तर :- लेखिका महादेवी वर्मा ने यह कथन राजेंद्र बाबू जैसे सच्चे चरित्र वाले व्यक्ति को अपने समक्ष रखते हुए कहा है और उन्होंने राजेंद्र बाबू की तुलना आज के नेताओं से करते हुए चिंता भी व्यक्त की है। लेखिका प्रश्न करते हुए कहती हैं कि क्या ईश्वर के पास से वह सांचा टूट गया है जिसमें ढालकर भगवान ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जैसे उच्च व पवित्र व्यक्तित्व वाले चरित्र का निर्माण किया था क्योंकि आजकल के नेताओं में राजेंद्र बाबू जैसी मधुरता, निश्चलता, सरलता और सौम्यता कहीं भी दिखाई नहीं देती ।

(ख) भाषा बोध

निम्नलिखित में संधि कीजिए :

शीत  + अवकाश   =  शीतावकाश

मुख  + आकृति     =  मुखाकृति

प्रति  +  ईक्षा         =  प्रतीक्षा

विद्या  +  अर्थी      =   विद्यार्थी

छात्र   + आवास   =   छात्रावास

प्रति   + अक्ष        =   प्रत्यक्ष

 

निम्नलिखित शब्दों का संधि विच्छेद कीजिए :

राजेंद्र      =    राज + इंद्र

फलाहार  =    फल + आहार

मिष्ठान्न     =    मिष्ठ + अन्न

व्यवस्था   =    वि  + अवस्था

 

वातावरण       =      वात + आवरण

व्यतीत           =      वि + अतीत

प्रत्येक           =       प्रति + एक

एकासन         =       एक + आसन

 

3) निम्नलिखित विग्रह पदों को समस्त पद में बदलिए :

राष्ट्र का पति       =     राष्ट्रपति                                                      रसोई के लिए घर     =      रसोईघर

कर्म में निष्ठा       =     कर्मनिष्ठा                                                    विद्या की पीठ           =     विद्यापीठ                                                   

गंगा में स्नान       =      गंगास्नान                                                    राष्ट्रपति का भवन     =     राष्ट्रपति भवन

4) निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए :

गाँव का रहने वाला          =     ग्रामीण                                नगर में रहने वाला                =      नागरिक

कृषि कर्म करने वाला       =     कृषक                                छात्रों के रहने का स्थान         =      छात्रावास

जिसका कोई शत्रु न हो    =     अजातशत्रु                           जिसे पराजित ना किया जा सके    =  अपराजेय

अतिथि का स्वागत करने वाला   =  आतिथेय

लेखन   - विनोद कुमार (हिंदी शिक्षक)स.ह.स.बुल्लेपुर,लुधियाना

         गुरप्रीत कौर(हिंदी शिक्षिका) स ह स लापरा लुधियाना

         शेखर (हिंदी शिक्षक) स.मि.स. दातारपुर रूपनगर

संशोधक – डॉ॰ राजन (हिंदी शिक्षक)लोहारका कलां, अमृतसर