नमस्ते व नमस्कार में अंतर

नमस्ते
नमः= प्रह्वीभवनम् , ते= तुभ्यम्। तुम्हें नमन। चतुर्थी के एकवचन 'तुभ्यम्'  के स्थान पर 'तेमयावेकवचनस्य ८.१.२२' इस पाणिनीय अष्टाध्यायी के सूत्र से 'ते' आदेश होता है।

नमस्कारः
नमः करोति इति नमस्कारः। नमस्√कृ (डुकृञ् करणे)+ अ (अण्)= नमस्कारः।
इधर-उधर के तर्क देकर भले ही हिन्दी में इन दोनों शब्दों के अर्थ में अन्तर कर लो, लेकिन पाणिनीय व्याकरण के अनुसार तो ये दोनों शब्द 'आपको नमस्कार' इस अर्थ लिए प्रयुक्त हैं। 
हिन्दी भाषा का कोई भी वैयाकरण पाणिनि मुनि की बराबरी नहीं कर सका है।